× About Us Home Founder Contact Us Privacy Policy
SanatanShakti.in

दिवाली धनतेरस 2025 तिथि एवं पूजन मुहूर्त

Diwali Dhanteras 2025

18 अक्टूबर 2025 को धनतेरस है एवं 20 अक्टूबर 2025 को दीपावली है।

दिवाली धनतेरस तिथि एवं पूजन मुहूर्त
आलेख © कॉपीराइट तकसाधक प्रभात (Sadhak Prabhat)

दीपावली महालक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 20 अक्टूबर 2025 को दीपावली है।

काशी में 20 अक्टूबर 2025 को सूर्यास्त 5 बजकर 41 मिनट पर है। प्रदोष काल तथा स्थिर लग्न में लक्ष्मी गणेश कुबेर आदि देवताओं का दीपावली पूजन होगा। निशिथकाल मुहूर्त में महाकाली का पूजन होगा भारत के बाकी शहरों का मुहूर्त काशी के मुहूर्त से उतना मिनट आगे या पीछे होगा जितना मिनट आगे या पीछे वहाँ सूर्यास्त होगा।

दिन का स्थिर लग्न कुंभ का मुहूर्त - दोपहर 2 बजकर 56 मिनट से 4 बजकर 5 मिनट तक है।

प्रदोष काल का मुहूर्त - शाम 4 बजकर 56 मिनट से रात्रि 6 बजकर 26 मिनट तक है। इसमें मीन लग्न की प्रधानता है ।

स्थिर लग्न वृष का मुहूर्त - रात 7 बजकर 10 मिनट से रात्रि 9 बजकर 6 मिनट तक है। यह सबसे उत्तम है।

निशिथकाल मध्य रात्रि का मुहूर्त - रात 11 बजकर 40 मिनट से रात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक है। यह चर लग्न कर्क है, अत: उतना अच्छा नहीं है।

स्थिर लग्न सिंह का मुहूर्त - रात 1 बजकर 38 मिनट से रात्रि 3 बजकर 52 मिनट तक है। यह भी सबसे उत्तम है।

धनतेरस पूजा मुहूर्त, धनत्रयोदशी पूजा - 18 अक्टूबर 2025

धनतेरस पूजा मुहूर्त वृषभ काल शाम 7 बजकर 18 मिनट से रात 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा स्थिर लगन में रहेगा।

प्रदोष काल 18 अक्टूबर 2025 - 4 बजकर 57 मिनट से 6 बजकर 24 मिनट तक।

यम दीप 18 अक्टूबर 2025, शनिवार, को हीं पड़ेगा। कुछ जगह वंश परंपरा से 19 अक्टूबर 2025, को भी देवता के दिया के साथ पड़ेगा।

काशी में सूर्यास्त काल 18 अक्टूबर 2025 - 5 बजकर 42 मिनट

(ध्यान दें लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान ही होता है, जब स्थिर लग्न प्रचलित होती है । ऐसा माना जाता है, कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है इसीलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है । वृषभ लग्न को स्थिर माना जाता है और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होता है ।)

धनतेरस को धन त्रयोदशी भी कहते हैं| कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को धन के देवता कुबेर और मृत्यु देवता यमराज की पूजा का विशेष महत्व है । इसी दिन देवताओं के वैद्य धनवंतरि ऋषि अमृत कलश सहित सागर मंथन से प्रकट हुए थे । अतः इस दिन धनवंतरी जयंती मनायी जाती है । निरोग रहते हेतु उनका पूजन किया जाता है । इस दिन अपने सामथ्र्य अनुसार किसी भी रुप मे चादी एवं अन्य धातु खरीदना अति शुभ है । धन संपति की प्राप्ति हेतु कुबेर देवता के लिए घर के पूजा स्थल पर दीप दान करें एवं मृत्यु देवता यमराज ( जो अकाल मृत्यु से करता है ) के लिए मुख्य द्वार पर भी दीप दान करें ।आज के दिन घर के द्वार पर एक दीपक जलाकर रखा जाता है। आज के दिन नये बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन यमराज और भगवान धनवन्तरि की पूजा का महत्व है।

दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है जो ग्रेगोरी कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। आध्यात्मिक रूप से यह 'अन्धकार पर प्रकाश की विजय' को दर्शाता है। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' अर्थात (हे भगवान!) मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाइए। यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का हृदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है।

श्री महालक्ष्मी के सभी मंत्र, स्त्रोत, पूजन विधि, सारी जानकारी एक जगह।

दिवाली धनतेरस तिथि एवं पूजन मुहूर्त * दीपावली महालक्ष्मी पूजन मूल विधि सामान्य सरल पूजा * श्री महालक्ष्मी दिवाली विशेष पूजा * दीपावली दीपमालिका पूजन * द्वार पूजन * दवात श्रीमहाकाली पूजन * लेखनी पूजन * बही खाता सरस्वती पूजन * तिजोरी-कुबेर पूजन * तुला-पूजन * श्री कुबेर उपासना विधि * दीपावली एवं धनतेरस में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए * नरक चतुर्दशी * महालक्ष्मी अष्टक * लक्ष्मी चालीसा * लक्ष्मी आरती * अष्टलक्ष्मी स्तोत्र * श्री वैभव लक्ष्मी व्रत * श्री महालक्ष्मी 108 नाम * श्री लक्ष्मी सहस्रनामावलिः (1008 नाम) * श्री लक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्रं * कनकधारा स्तोत्रम् * सर्वदेव कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्रम् * इन्द्रकृत लक्ष्मी स्तोत्रम् * राशि के अनुसार माता लक्ष्मी के बीज मंत्र * राशि के अनुसार दीपावली पूजन * धन-लक्ष्मी को बुलाने के लिये वास्तु उपाय * महालक्ष्‍मी व्रत * श्राद्ध पक्ष में महालक्ष्मी व्रत * धन प्राप्त करने के तांत्रिक लक्ष्मी मंत्र उपाय * धन प्राप्ति में बाधक वास्तुदोष कैसे दूर करें * धन पाने के आसान उपाय सबसे कारगर लक्ष्मी मंत्र क्या है?
 
www.sanatanshakti.in/

***********

diwali-dhanteras-date-muhuratतकindianstates.in