वर वरण (तिलक) वरीक्षा (छेका फलदान) मुहूर्त शुभ मुहूर्त वर्ष 2026
Varan Variksha Muhurat Auspicious Time Year 2026

वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त वर्ष 2026
हिंदू विवाह पद्धति में वरीक्षा संस्कार विवाह संस्कार का प्रथम चरण है। इसमें कन्या के परिवार वाले अपनी कन्या के लिये वर का वरण (चुनाव ) करते हैं और वरीक्षा संस्कार करते हैं जिसमें विवाह के पूर्व ही कन्या के पिता के द्वारा यह घोषणा होती है कि आज से आप मेरे कन्या के लिए श्रेष्ठ वर हैं। इसी संस्कार को छेका या फलदान भी कहते हैं।
वर वरण संस्कार को हम लोग आजकल तिलक के नाम से जानते हैं। यह विवाह संस्कार का दूसरा चरण है। इसमें पुरोहित वर को पूर्वाभिमुख तथा तिलक करने वाले (पिता, भाई आदि) पश्चिमाभिमुख बैठकर मंगलाचरण, षट्कर्म, तिलक, कलावा, कलशपूजन, गुरुवन्दना, गौरी-गणेश पूजन, सर्वदेव नमस्कार, स्वस्तिवाचन आदि कृत्य सम्पन्न करवाते हैं। इसके बाद कन्यादाता वर का यथोचित स्वागत-सत्कार (पैर धुलाना, आचमन कराना तथा हल्दी से तिलक करके अक्षत लगाना) कर, तदुपरान्त 'वर' को प्रदान की जाने वाली समस्त सामग्री (थाल-थान, फल-फूल, द्रव्य-वस्त्रादि) कन्यादाता हाथ में लेकर संकल्प मन्त्र बोलते हुए वर को प्रदान करते हैं।
पुरे कर्मकांड में सर्वाधिक महत्वपूर्ण संकल्प मन्त्र हीं है, अत: संकल्प मन्त्र दे रहा हूँ ताकि संकल्प सही से हो पाए। आमतौर पर शुद्ध उच्चरण होने में कठिनाई होती है।
कन्यादाता के लिए संकल्प मन्त्र -
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य, अद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीये पर्राधे श्रीश्वेतवाराहकल्पे, वैवस्वतमन्वन्तरे, भूर्लोके, जम्बूद्वीपे, भारतर्वषे, भरतखण्डे, आर्यावर्त्तैकदेशान्तर्गते, . उत्तर प्रदेश अंतर्गत क्षेत्रे, .......... विक्रमाब्दे ... विरोधकृत नाम....... संवत्सरे .......... मासानां मासोत्तमेमासे ...... .... मासे .......... पक्षे .......... तिथौ .......... वासरे .......... गोत्रोत्पन्नः ............(कन्यादाता) नामाऽहं ...............(कन्या-नाम) नाम्न्या कन्यायाः (भगिन्याः) करिष्यमाण उद्वाहकमर्णि एभिवर्रणद्रव्यैः ...............(वर का गोत्र) गोत्रोत्पन्नं ...............(वर का नाम) नामानं वरं कन्यादानार्थं वरपूजनपूर्वकं त्वामहं वृणे, तन्निमित्तकं यथाशक्ति भाण्डानि, वस्त्राणि, फलमिष्टान्नानि द्रव्याणि च...............(वर का नाम) वराय समपर्ये।
भगवान् गणेश आपके हर कार्य को शुभ एवं सफल बनाएँ।
हार्दिक शुभकामना।
- साधक प्रभात।
जनवरी में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
| तारीख और दिन | मुहूर्त का नक्षत्र | ||
| 1 | कोई मुहूर्त नहीं है। | ||
फरवरी में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
| तारीख और दिन | मुहूर्त का नक्षत्र | ||
| 1 | 5 फरवरी गुरुवार | - उत्तराफाल्गुनी में। | |
| 2 | 6 फरवरी शुक्रवार | - हस्त में। | |
| 3 | 8 फरवरी रविवार | - स्वाति में। | |
| 4 | 10 फरवरी मंगलवार | - अनुराधा में। | |
| 5 | 11 फरवरी बुधवार | - अनुराधा में। | |
| 6 | 12 फरवरी गुरुवार | - मूल में। | |
| 7 | 13 फरवरी शुक्रवार | - मूल में। | |
| 8 | 14 फरवरी शनिवार | - पूर्वाषाढ़ा में। | |
| 9 | 15 फरवरी रविवार | - उत्तराषाढ़ा में। | |
| 10 | 19 फरवरी गुरुवार | - पूर्वाभाद्र में। | |
| 11 | 20 फरवरी शुक्रवार | - उत्तराभाद्र में। | |
| 12 | 21 फरवरी शनिवार | - रेवती में। | |
| 13 | 24 फरवरी मंगलवार | - कृत्तिका में। | |
| 14 | 25 फरवरी बुधवार | - रोहिणी में। | |
| 15 | 26 फरवरी गुरुवार | - मृगशिरा में। | |
मार्च में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
| तारीख और दिन | मुहूर्त का नक्षत्र | ||
| 1 | 2 मार्च सोमवार | - मघा में। | |
| 2 | 3 मार्च मंगलवार | - पूर्वाफाल्गुनी में। | |
| 3 | 4 मार्च बुधवार | - उत्तराफाल्गुनी में। | |
| 4 | 5 मार्च गुरुवार | - हस्त में। | |
| 5 | 8 मार्च रविवार | - स्वाति में। | |
| 6 | 10 मार्च मंगलवार | - अनुराधा में। | |
| 7 | 11 बुधवार | - मूल में। | |
| 8 | 12 गुरुवार | - मूल में। | |
| 9 | 13 शुक्रवार | - पूर्वाषाढ़ा में। |
अप्रैल में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
| तारीख और दिन | मुहूर्त का नक्षत्र | ||
| 1 | 20 अप्रैल सोमवार | - रोहिणी में। | |
| 2 | 21 अप्रैल मंगलवार | - मृगशिरा में। | |
| 3 | 26 अप्रैल रविवार | - मघा में। | |
| 4 | 27 अप्रैल सोमवार | - पूर्वाफाल्गुनी में। | |
| 5 | 28 अप्रैल मंगलवार | - उत्तराफाल्गुनी में। | |
| 6 | 29 अप्रैल बुधवार | - हस्त में। |
मई में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
| तारीख और दिन | मुहूर्त का नक्षत्र | ||
| 1 | 1 मई शुक्रवार | - स्वाति में। | |
| 2 | 3 मई रविवार | - अनुराधा में। | |
| 3 | 6 मई बुधवार | - मूल में। | |
| 4 | 7 मई गुरुवार | - पूर्वाषाढ़ा में। | |
| 5 | 8 मई शुक्रवार | - उत्तराषाढ़ा में। | |
| 6 | 12 मई मंगलवार | - पूर्वाभाद्र में। | |
| 7 | 14 मई गुरुवार | - रेवती में। |
जून में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
| तारीख और दिन | मुहूर्त का नक्षत्र | ||
| 1 | 19 जून शुक्रवार | - मघा में। | |
| 2 | 20 जून शनिवार | - माघ/पूर्वा फाल्गुनी में। | |
| 3 | 21 जून रविवार | - पूर्वा फाल्गुनी में। | |
| 4 | 22 जून सोमवार | - उत्तरा फाल्गुनी में। | |
| 5 | 23 जून मंगलवार | - हस्त में। | |
| 6 | 24 जून बुधवार | - स्वाति में। | |
| 7 | 25 जून गुरुवार | - स्वाति में। | |
| 8 | 27 जून शनिवार | - अनुराधा में। | |
| 9 | 29 जून सोमवार | - मूल में। | |
| 10 | 30 जून मंगलवार | - पूर्वाषाढ़ा में। |
जुलाई में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
| तारीख और दिन | मुहूर्त का नक्षत्र | ||
| 1 | 1 जुलाई बुधवार | - उत्तराषाढ़ा में। | |
| 2 | 5 जुलाई रविवार | - पूर्वाभाद्र में। | |
| 3 | 7 जुलाई मंगलवार | - उत्तराभाद्र में। | |
| 4 | 8 जुलाई बुधवार | - रेवती में। | |
| 5 | 10 जुलाई शुक्रवार | - कृत्तिका में। | |
| 6 | 11 जुलाई शनिवार | - रोहिणी में। | |
| 7 | 12 जुलाई रविवार | - मृगशिरा में। |
अगस्त में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
इस माह में कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
सितंबर में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
इस माह में कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
अक्टूबर में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
इस माह में कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
नवंबर में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
| तारीख और दिन | मुहूर्त का नक्षत्र | ||
| 1 | 19 नवंबर गुरुवार | - पूर्वाभाद्र में। | |
| 2 | 20 नवंबर शुक्रवार | - उत्तरा भाद्रपद में। | |
| 3 | 21 नवंबर शनिवार | - रेवती में। | |
| 4 | 24 नवंबर मंगलवार | - कृत्तिका में। | |
| 5 | 25 नवंबर बुधवार | - रोहिणी में। | |
| 6 | 26 नवंबर गुरुवार | - मृगशिरा में। | |
| 7 | 30 नवंबर सोमवार | - माघ में। |
दिसंबर में वरण वरण (तिलक ) वरीक्षा (छेका फलदान सगाई) शुभ मुहूर्त
| तारीख और दिन | मुहूर्त का नक्षत्र | ||
| 1 | 1 दिसंबर मंगलवार | - माघ में। | |
| 2 | 2 दिसंबर बुधवार | - पूर्वा फागुनी में। | |
| 3 | 3 दिसंबर गुरुवार | - उत्तरा फागुनी में। | |
| 4 | 4 दिसंबर शुक्रवार | - हस्त में। | |
| 5 | 5 दिसंबर शनिवार | - स्वाति में। | |
| 6 | 6 दिसंबर रविवार | - स्वाति में। | |
| 7 | 10 दिसंबर गुरुवार | - मूल में। | |
| 8 | 11 दिसंबर शुक्रवार | - पूर्वाषाढ़ा में। | |
| 12 दिसंबर शनिवार | - उत्तराषाढ़ा में। |
भगवान् गणेश सब की मनोकामना पूर्ण करें
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