सूर्य गायत्री मंत्र
Surya Gayatri Mantra

आलेख © कॉपीराइट - साधक प्रभात (Sadhak Prabhat)
सूर्य गायत्री मंत्र
जातक की कुंडली में सूर्य ग्रह के सभी नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए सूर्य गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है। इस मंत्र के जाप से शरीर को स्वास्थ्य और शक्ति मिलती है। आंखों की रोशनी बढ़ती है और त्वचा संबंधी समस्याओं से भी छुटकारा मिलती है। मानसिक शांति मिलाती है। सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने का सबसे अच्छा समय सूर्य ग्रहण के दौरान होता है।
सूर्य गायत्री मंत्र -
ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।।
अर्थ- मैं सूर्य देवता को नमन करता हूं। हे प्रभु, दिन के निर्माता, मुझे बुद्धि दो और मेरे मन को प्रकाशित करो।
सूर्य गायत्री मंत्र जाप विधि -
सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्योदय के दौरान होता है। प्रतिदिन इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। इस मंत्र का जाप करते समय मुख की दिशा पूर्व होनी चाहिए।
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